जनरल टिकट को एसी कोच में बदलवाने का दिया झांसा, दो मजदूरों के खातों से उड़ाए 90,500 रुपये
हरिद्वार। दीपावली पर बच्चों के पास घर लौटने के लिए दस महीने तक मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ने वाले पश्चिम बंगाल के दो मजदूर ठगी का शिकार हो गए। जनरल टिकट को एसी कोच में बदलवाने का झांसा देकर उनकी नकदी, मोबाइल और बैग हड़पने के साथ ही बैंक खातों से 90,500 रुपये निकाल लिए गए। जीआरपी हरिद्वार ने मामले का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ित का मोबाइल और बैग बरामद किया गया है, जबकि ठगी की रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं।
जीआरपी कप्तान अरुणा भारती ने प्रेस वार्ता में बताया कि 10 अक्टूबर की रात पश्चिम बंगाल के बर्धमान निवासी बिस्वजीत सौरेन और रंजीत कोरा हरिद्वार रेलवे स्टेशन से कुंभ एक्सप्रेस के जरिए आसनसोल जाने के लिए पहुंचे थे। दोनों ने जनरल टिकट लिए थे। इसी दौरान दो युवक उनके पास आए और खुद को रेलवे से जुड़ा बताकर कहा कि उनके मामा टीटी हैं, जो जनरल टिकट को एसी थर्ड कोच में बदलवा देंगे। इसके बाद गिरोह के एक सदस्य को फर्जी टीटी के रूप में पेश किया गया। आरोपितों ने रेलवे के नियमों का हवाला देकर मजदूरों को अपने विश्वास में ले लिया। उन्होंने दोनों से मोबाइल, पिन कोड, बैग और नकदी अपने पास जमा करा ली। इस दौरान 12 हजार रुपये नकद भी ले लिए। कई घंटे इंतजार के बाद जब सामान की कोई रसीद नहीं मिली तो मजदूरों को शक हुआ। अगले दिन बैंक से जानकारी करने पर पता चला कि उनके खातों से कुल 90,500 रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके बाद पीड़ितों ने जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई।
सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र से खुला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ जीआरपी अनुज के पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर बिपिन चंद्र पाठक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र, मैन्युअल पुलिसिंग और पीड़ितों से मिले हुलिये व बातचीत के तरीके की जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। महज 30 घंटे के भीतर पांचों आरोपितों को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपित बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़कर भागने की फिराक में थे।
महंगे शौक पूरे करने के लिए चुना ठगी का रास्ता
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद, पीड़ित का वनप्लस मोबाइल और बैग बरामद किया है। मोबाइल की कीमत 17,300 रुपये बताई गई है। इसके अलावा खातों में स्थानांतरित ठगी की रकम में से 49,999 रुपये फ्रीज कराए गए हैं। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह रकम पीड़ितों को लौटाने की कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सौरभ मंडल उम्र 24 वर्ष, सुमित मंडल उम्र 20 वर्ष, किशन कुमार उम्र 19 वर्ष, जितेंद्र कुमार चौधरी उम्र 24 वर्ष और बंटी कुमार उम्र 20 वर्ष के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपित बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिले के निवासी हैं। इनमें सौरभ मजदूरी, सुमित ऑटो चलाने, किशन सब्जी बेचने, जितेंद्र राजमिस्त्री और टाइल्स लगाने का काम करता था। बंटी 12वीं पास है। पुलिस का कहना है कि महंगी बाइक, मोबाइल और अन्य शौक पूरे करने के लालच में आरोपितों ने ठगी का रास्ता चुना। उनके आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है।
जीआरपी कप्तान अरुणा भारती ने कहा कि मेहनत की कमाई लूटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस टीम की सराहना करते हुए फ्रीज कराई गई रकम दीपावली से पहले पीड़ितों के खातों में वापस कराने का प्रयास करने की बात कही।



